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श्लोक 9.65.46  |
अपक्रम्य तु ते तूर्णं तस्मादायोधनान्नृप।
शोकसंविग्नमनसश्चिन्ताध्यानपराभवन्॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| नरेश्वर! वे तीनों महारथी शोक से व्याकुल होकर तुरंत ही युद्धभूमि से हट गए और चिन्ता एवं कर्तव्य के विचार में मग्न हो गए॥46॥ |
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| Nareshwar! Distraught with grief, those three great warriors immediately moved away from the battlefield and became engrossed in thoughts of worry and duty. 46॥ |
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इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि अश्वत्थामसैनापत्याभिषेके पञ्चषष्टितमोऽध्याय:॥ ६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें अश्वत्थामाका सेनापतिके पदपर अभिषेकविषयक पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६५॥
॥ शल्यपर्व सम्पूर्णम्॥ |
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