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mahabharat 9.65.44: महाराज! राज्याभिषेक के पश्चात अश्वत्थामा ने महाबली राजा दुर्योधन को गले लगाया और अपनी गर्जना से समस्त दिशाओं को गुंजायमान करते हुए वहाँ से प्रस्थान किया।   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.65.44 
सोऽभिषिक्तो महाराज परिष्वज्य नृपोत्तमम्।
प्रययौ सिंहनादेन दिश: सर्वा विनादयन्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राज्याभिषेक के पश्चात अश्वत्थामा ने महाबली राजा दुर्योधन को गले लगाया और अपनी गर्जना से समस्त दिशाओं को गुंजायमान करते हुए वहाँ से प्रस्थान किया।
 
Maharaj! After the coronation, Ashvatthama embraced the great king Duryodhan and departed from there, making all directions resonate with his roar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)