श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.65.23 
ईदृशो लोकधर्मोऽयं धात्रा निर्दिष्ट उच्यते।
विनाश: सर्वभूतानां कालपर्यायमागत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मित्रों! इस मृत्युलोक का धर्म ऐसा ही है। कहते हैं कि विधाता ने ऐसा ही बताया है; इसलिए एक-न-एक दिन समस्त प्राणियों के विनाश का समय अवश्य आता है॥ 23॥
 
‘Friends! Such is the Dharma (rule) of this mortal world. It is said that the Creator has instructed this; therefore, one day or the other, the hour of destruction of all creatures arrives.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas