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mahabharat 9.65.14: राजेन्द्र! पहले आप सम्पूर्ण लोकों के लोगों पर प्रभुत्व रखकर सम्पूर्ण जगत पर शासन करते थे। आज आप इस निर्जन वन में अकेले कैसे पड़े हैं?॥14॥   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.65.14 
भूत्वा हि नृपति: पूर्वं समाज्ञाप्य च मेदिनीम्।
कथमेकोऽद्य राजेन्द्र तिष्ठसे निर्जने वने॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! पहले आप सम्पूर्ण लोकों के लोगों पर प्रभुत्व रखकर सम्पूर्ण जगत पर शासन करते थे। आज आप इस निर्जन वन में अकेले कैसे पड़े हैं?॥14॥
 
‘Rajendra! Earlier you used to rule over the entire world by having dominion over the people of the entire world. How come you are lying alone in this deserted forest today?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)