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mahabharat 9.65.12: महाराज! उस समय अश्वत्थामा के नेत्रों में आँसू भर आए। वह रोते हुए सम्पूर्ण जगत के राजा भरतश्रेष्ठ दुर्योधन से इस प्रकार बोला- ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.65.12 
ततो द्रौणिर्महाराज बाष्पपूर्णेक्षण: श्वसन्।
उवाच भरतश्रेष्ठं सर्वलोकेश्वरेश्वरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय अश्वत्थामा के नेत्रों में आँसू भर आए। वह रोते हुए सम्पूर्ण जगत के राजा भरतश्रेष्ठ दुर्योधन से इस प्रकार बोला- ॥12॥
 
Maharaj! At that time Ashwatthama's eyes filled with tears. Sobbing, he spoke thus to Duryodhana, the best of Bharat, the king of the entire world – ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)