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mahabharat 9.63.77-78h: नरेश्वर! इधर पुण्यात्मा वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण की कृतज्ञता से वे पाण्डवों को देखने के लिए हस्तिनापुर से शिविर में लौट आये। 77 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  9.63.77-78h 
वासुदेवोऽपि धर्मात्मा कृतकृत्यो जगाम ह॥ ७७॥
शिबिरं हास्तिनपुराद् दिदृक्षु: पाण्डवान् नृप।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! इधर पुण्यात्मा वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण की कृतज्ञता से वे पाण्डवों को देखने के लिए हस्तिनापुर से शिविर में लौट आये। 77 1/2॥
 
Nareshwar! Here, due to the gratitude of the virtuous Vasudevanandan Shri Krishna, he returned to the camp from Hastinapur to see the Pandavas. 77 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)