Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.63.53-54h: हे भरतश्रेष्ठ! इन सब बातों और अपने अपराधों को ध्यान में रखते हुए, तुम्हें पांडवों के प्रति कल्याण की भावना रखते हुए उनकी रक्षा करनी चाहिए। तुम्हें नमस्कार है। 53 1/2।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  9.63.53-54h 
एतत् सर्वमनुध्याय आत्मनश्च व्यतिक्रमम्॥ ५३॥
शिवेन पाण्डवान् पाहि नमस्ते भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इन सब बातों और अपने अपराधों को ध्यान में रखते हुए, तुम्हें पांडवों के प्रति कल्याण की भावना रखते हुए उनकी रक्षा करनी चाहिए। तुम्हें नमस्कार है। 53 1/2।
 
Bhaarat's best! Thinking about all these things and your own crimes, you should protect the Pandavas with a feeling of well-being towards them. Salutations to you. 53 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)