श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  9.61.63 
मयानेकैरुपायैस्तु मायायोगेन चासकृत्।
हतास्ते सर्व एवाजौ भवतां हितमिच्छता॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
आप सभी की कुशलता की कामना करते हुए मैंने बार-बार अपनी माया का प्रयोग किया और विभिन्न उपायों से युद्धभूमि में उन सभी को मार डाला।
 
Wishing you all well, I repeatedly used my illusion and through various means killed them all on the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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