श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  9.61.58 
अत्यद्भुतानि ते दृष्ट्वा वासुदेवपुरोगमा:।
दुर्योधनस्य पूजां तु दृष्ट्वा व्रीडामुपागमन्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
ये असाधारण बातें और दुर्योधन की पूजा देखकर श्रीकृष्ण आदि सब लोग बहुत लज्जित हुए ॥58॥
 
Seeing these extraordinary things and the worship of Duryodhana, Sri Krishna and all others felt very ashamed. ॥ 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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