श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  9.61.47-48h 
यान्यकार्याणि चास्माकं कृतानीति प्रभाषसे॥ ४७॥
वैगुण्येन तवात्यर्थं सर्वं हि तदनुष्ठितम्।
 
 
अनुवाद
जो अधर्म कर्म तूने हमसे कहे हैं, वे सब तेरे महान दोष के कारण हुए हैं ॥47 1/2॥
 
The wrongful acts which you are telling us have been committed by you, have all been done due to your great fault. ॥ 47 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas