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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि
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श्लोक 33-34h
श्लोक
9.61.33-34h
वधार्थं पाण्डुपुत्रस्य याचितां शक्तिमेव च॥ ३३॥
घटोत्कचे व्यंसयत: कस्त्वत्त: पापकृत्तम:।
अनुवाद
पाण्डुपुत्र अर्जुन को मारने के लिए इन्द्र द्वारा माँगी गई शक्ति को आपने घटोत्कच पर छोड़ दिया। आपसे बड़ा पापी कौन हो सकता है?॥ 33 1/2॥
You released the power demanded by Indra to kill Arjuna, son of Pandu, on Ghatotkacha. Who can be a greater sinner than you?॥ 33 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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