श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  9.61.32-33h 
स चानेन नृशंसेन धृष्टद्युम्नेन वीर्यवान्॥ ३२॥
पात्यमानस्त्वया दृष्टो न चैनं त्वमवारय:।
 
 
अनुवाद
इस क्रूर धृष्टद्युम्न ने वीर आचार्य को ऐसी अवस्था में मार डाला कि तुमने अपनी आँखों से देखा; परन्तु तुमने उसका खंडन नहीं किया। 32 1/2
 
This cruel Dhrishtadyumna killed the valiant Acharya in such a condition that you saw it with your own eyes; but you did not deny it. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)