घातयित्वा महीपालानृजुयुद्धान् सहस्रश:॥ २९॥
जिह्मैरुपायैर्बहुभिर्न ते लज्जा न ते घृणा।
अनुवाद
अनेक कुटिल उपायों से धर्मयुद्ध करने वाले हजारों भूमिपालों का वध करने के पश्चात् भी तुम्हें न तो लज्जा आती है और न ही इस पापकर्म से घृणा होती है।
After killing thousands of Bhumipala's who easily fought a righteous war through many devious means, you neither feel ashamed nor do you feel disgusted by this evil deed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥