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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि
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श्लोक 27-28h
श्लोक
9.61.27-28h
कंसदासस्य दायाद न ते लज्जास्त्यनेन वै॥ २७॥
अधर्मेण गदायुद्धे यदहं विनिपातित:।
अनुवाद
हे कंस के पुत्र! गदायुद्ध में मुझे मारने के पापकर्म से क्या तुझे लज्जा नहीं आती?॥27 1/2॥
‘O son of Kansa's servant! Are you not ashamed of the evil deed of killing me in a mace fight?॥ 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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