श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  9.61.16 
दुर्योधनवधे यानि रोमाणि हृषितानि न:।
अद्यापि न विकृष्यन्ते तानि तद् विद्धि भारत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! दुर्योधन को मारते समय मेरे शरीर पर जो रोएँ उठे थे, वे अब भी ज्यों के त्यों हैं; वे गिर नहीं रहे हैं। आप उन्हें देख लीजिए।॥16॥
 
‘Bharatanandan! The goosebumps that rose on my body at the time of killing Duryodhan are still there as they were; they are not falling off. You should take a look at them.’॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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