Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.60.9-10: ऐसा कहकर महाबली बलरामजी अपना हल उठाकर भीमसेन की ओर दौड़े। उस समय उनकी भुजाएँ ऊपर उठी हुई थीं और उनका रूप एक विशाल श्वेत पर्वत के समान दिखाई दे रहा था, जिसमें अनेक धातुएँ होने के कारण विचित्र शोभा हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  9.60.9-10 
ततो लाङ्गलमुद्यम्य भीममभ्यद्रवद् बली॥ ९॥
तस्योर्ध्वबाहो: सदृशं रूपमासीन्महात्मन:।
बहुधातुविचित्रस्य श्वेतस्येव महागिरे:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर महाबली बलरामजी अपना हल उठाकर भीमसेन की ओर दौड़े। उस समय उनकी भुजाएँ ऊपर उठी हुई थीं और उनका रूप एक विशाल श्वेत पर्वत के समान दिखाई दे रहा था, जिसमें अनेक धातुएँ होने के कारण विचित्र शोभा हो रही थी।
 
Saying this, the mighty Balarama picked up his plough and ran towards Bhimasena. At that time, with his arms raised high, the form of the great Balarama appeared like a great white mountain, which had a strange beauty due to the presence of many metals. 9-10.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)