Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.60.38: इसलिए मैंने सोचा कि काम-वासना से ग्रस्त लोभी और अजेय दुर्योधन को मारकर तथा धर्म या अधर्म का पालन करके पाण्डुपुत्र भीम को उसकी इच्छा पूरी करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माद्धत्वाकृतप्रज्ञं लुब्धं कामवशानुगम्।
लभतां पाण्डव: कामं धर्मेऽधर्मे च वा कृते॥ ३८॥
अनुवाद
इसलिए मैंने सोचा कि काम-वासना से ग्रस्त लोभी और अजेय दुर्योधन को मारकर तथा धर्म या अधर्म का पालन करके पाण्डुपुत्र भीम को उसकी इच्छा पूरी करनी चाहिए।
Therefore I thought that by killing the greedy and unconquered Duryodhana who is overcome by lust and by doing either dharma or adharma, Bhima, son of Pandu, should fulfill his desire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥