Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.60.35: युधिष्ठिर बोले - "श्रीकृष्ण! भीमसेन ने जिस प्रकार क्रोध में आकर राजा दुर्योधन के सिर पर लात मारी, वह मुझे भी अच्छा नहीं लगा। मैं प्रसन्न नहीं हूँ, क्योंकि मेरे कुल का नाश हो गया।" | mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
न ममैतत् प्रियं कृष्ण यद् राजानं वृकोदर:।
पदा मूर्ध्न्यस्पृशत् क्रोधान्न च हृष्ये कुलक्षये॥ ३५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "श्रीकृष्ण! भीमसेन ने जिस प्रकार क्रोध में आकर राजा दुर्योधन के सिर पर लात मारी, वह मुझे भी अच्छा नहीं लगा। मैं प्रसन्न नहीं हूँ, क्योंकि मेरे कुल का नाश हो गया।"
Yudhishthira said - Shri Krishna! I also did not like the way Bhimasena kicked the head of King Duryodhan in anger. I am not happy because my clan has been destroyed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥