श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  9.59.4-5h 
गौर्गौरिति पुरा मन्द द्रौपदीमेकवाससम्।
यत् सभायां हसन्नस्मांस्तदा वदसि दुर्मते॥ ४॥
तस्यावहासस्य फलमद्य त्वं समवाप्नुहि।
 
 
अनुवाद
हे मिथ्या बुद्धि वाले मूर्ख! पहले तूने मुझे 'बैल-बैल' कहकर, सभा में वस्त्राभूषणों से युक्त द्रौपदी को लाकर तथा हम सबको कठोर वचन कहकर हमारा उपहास किया था। आज तू उस उपहास का फल भोगेगा। ॥4 1/2॥
 
You fool with a false intellect! Earlier you had mocked us by calling me 'Bull, Bull' and by bringing a clothed Draupadi in the assembly and by speaking harsh words to all of us. Today you will reap the fruits of that mockery.' ॥ 4 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)