संजय कहते हैं: 'हे राजन! ऐसा कहकर धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर शोक से अभिभूत होकर दीर्घकाल तक विलाप करते रहे।
Sanjaya says: 'O King! Having said this, King Yudhishthira, the son of Dharma, being overwhelmed with grief, kept lamenting for a long time, letting out long sighs.
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि युधिष्ठिरविलापे एकोनषष्टितमोऽध्याय:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें युधिष्ठिरका विलापविषयक उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥