श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  9.59.18 
हतबन्धुर्हतामात्यो भ्रष्टसैन्यो हतो मृधे।
सर्वाकारेण शोच्योऽयं नावहास्योऽयमीश्वर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘उसके भाई और मंत्री मारे गए, सेना नष्ट हो गई और वह स्वयं भी युद्ध में मारा गया। ऐसी स्थिति में राजा दुर्योधन उपहास के नहीं, अपितु शोक के योग्य ही है॥18॥
 
‘His brothers and ministers were killed, the army was destroyed and he himself was killed in the war. In such a situation, King Duryodhana is absolutely worthy of mourning, not ridicule.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)