तथैव सिद्धा राजेन्द्र तथा वातिकचारणा:।
नरसिंहौ प्रशंसन्तौ विप्रजग्मुर्यथागतम्॥ ६२॥
अनुवाद
राजन! इसी प्रकार सिद्ध, वातिक और चारण भी उन दोनों सिंहपुरुषों की प्रशंसा करते हुए जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार चले गये।
King! Similarly, the Siddhas, Vaatiks (air-walkers) and Charanas went away in the same manner as they had come, praising those two lion-men.
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि दुर्योधनवधेऽष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें दुर्योधनका वधविषयक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥