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mahabharat 9.58.58-59h: हे श्रेष्ठ राजा! तालाब और कुएँ रक्त से लबालब भर गए और विशाल नदियाँ अपने उद्गम की ओर उलटी ओर बहने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  9.58.58-59h 
ह्रदा: कूपाश्च रुधिरमुद्वेमुर्नृपसत्तम॥ ५८॥
नद्यश्च सुमहावेगा: प्रतिस्रोतोवहाभवन्।
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ राजा! तालाब और कुएँ रक्त से लबालब भर गए और विशाल नदियाँ अपने उद्गम की ओर उलटी ओर बहने लगीं।
 
O best king! The ponds and wells began to overflow with blood, and the mighty rivers began to flow backwards towards their sources. 58 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)