श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  9.58.50-51h 
महास्वना पुनर्दीप्ता सनिर्घाता भयंकरी॥ ५०॥
पपात चोल्का महती पतिते पृथिवीपतौ।
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के अधिपति दुर्योधन के गिर जाने पर पुनः एक अग्निमय, भयंकर और विशाल उल्कापिंड बड़ी भयंकर ध्वनि और वज्र के साथ आकाश से पृथ्वी पर गिरा। 50 1/2॥
 
After the fall of Duryodhana, the ruler of the earth, a fiery, fierce and huge meteor again fell on the ground from the sky with a great sound and a thunderbolt. 50 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)