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mahabharat 9.58.45-46: भीमसेन समझ गए कि राजा दुर्योधन क्या करना चाहता है। अतएव, जो छल करके उनके ऊपर चढ़ने को आतुर था, उस पर आक्रमण करके भीमसेन ने सिंह के समान गर्जना की और अपनी गदा से उसकी जाँघों पर बड़े जोर से प्रहार किया ॥45-46॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  9.58.45-46 
अबुद्धॺद् भीमसेनस्तु राज्ञस्तस्य चिकीर्षितम्।
अथास्य समभिद्रुत्य समुत्क्रुश्य च सिंहवत्॥ ४५॥
सृत्या वञ्चयतो राजन् पुनरेवोत्पतिष्यत:।
ऊरुभ्यां प्राहिणोद् राजन् गदां वेगेन पाण्डव:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन समझ गए कि राजा दुर्योधन क्या करना चाहता है। अतएव, जो छल करके उनके ऊपर चढ़ने को आतुर था, उस पर आक्रमण करके भीमसेन ने सिंह के समान गर्जना की और अपनी गदा से उसकी जाँघों पर बड़े जोर से प्रहार किया ॥45-46॥
 
Bhimasena understood what King Duryodhana wanted to do. So, attacking Duryodhana who wanted to trick and jump on top of him, Bhimasena roared like a lion and struck his thighs with great force with his mace. ॥ 45-46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)