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mahabharat 9.58.21: महात्मा भगवान केशव के ये वचन सुनकर अर्जुन ने भीमसेन की ओर देखते हुए अपनी बाईं जंघा पर थपकी दी।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  9.58.21 
धनंजयस्तु श्रुत्वैतत् केशवस्य महात्मन:।
प्रेक्षतो भीमसेनस्य सव्यमूरुमताडयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महात्मा भगवान केशव के ये वचन सुनकर अर्जुन ने भीमसेन की ओर देखते हुए अपनी बाईं जंघा पर थपकी दी।
 
Upon hearing these words of the great soul Lord Keshav, Arjuna slapped his left thigh while looking at Bhimasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)