श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.58.10 
पुनरेव तु वक्ष्यामि पाण्डवेय निबोध मे।
धर्मराजापराधेन भयं न: पुनरागतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! मैं तुमसे यह बात पुनः कह रहा हूँ, कृपया इसे ध्यानपूर्वक सुनो। धर्मराज के अपराध के कारण हम पुनः भयभीत हो गये हैं।
 
O son of Pandu! I am telling you this again, please listen to it carefully. Due to the crime of Dharmaraj, we are once again in fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)