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mahabharat 9.57.45-46h: महाराज! यह बड़े आश्चर्य की बात थी कि गदा लगने पर भी भीमसेन एक कदम भी नहीं हिले। सभी सैनिकों ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।   |   mahabharat अध्याय 9.57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  9.57.45-46h 
आश्चर्यं चापि तद् राजन् सर्वसैन्यान्यपूजयन्॥ ४५॥
यद् गदाभिहतो भीमो नाकम्पत पदात् पदम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! यह बड़े आश्चर्य की बात थी कि गदा लगने पर भी भीमसेन एक कदम भी नहीं हिले। सभी सैनिकों ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।
 
King! It was a great wonder that even after being hit by the mace, Bhimasena did not move even a step. All the soldiers praised him profusely. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)