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mahabharat 9.55.50: महाराज! वे दोनों महारथी हाथ में गदा लिये हुए वहाँ खड़े होकर एक दूसरे को कठोर शब्दों से पीड़ा दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  9.55.50 
तौ तथा तु महाराज गदाहस्तौ सुदु:सहौ।
अन्योन्यं वाग्भिरुग्राभिस्तक्षमाणौ व्यवस्थितौ॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे दोनों महारथी हाथ में गदा लिये हुए वहाँ खड़े होकर एक दूसरे को कठोर शब्दों से पीड़ा दे रहे थे।
 
Maharaj! With maces in their hands both those formidable warriors stood there tormenting each other with their harsh words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)