Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.55.46-49: दुर्योधन की बात सुनकर सबने उसे स्वीकार कर लिया। फिर राजाओं का वह विशाल समूह वहाँ सर्वत्र विराजमान हो गया। राजाओं का वह समूह आकाश में सूर्य के समान शोभायमान हो रहा था। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई, महाबाहु बलरामजी उनके बीच में विराजमान थे। महाराज! सब ओर से सम्मानित होकर, नीलवस्त्रधारी, गौर वर्ण वाले बलभद्रजी राजाओं के बीच में उसी प्रकार शोभायमान हो रहे थे, जैसे रात्रि में तारों से घिरा हुआ पूर्ण चन्द्रमा शोभायमान होता है। 46-49।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 46-49
 
 
श्लोक  9.55.46-49 
श्रुत्वा दुर्योधनवच: प्रत्यपद्यन्त तत्तथा॥ ४६॥
तत: समुपविष्टं तत् सुमहद्राजमण्डलम्।
विराजमानं ददृशे दिवीवादित्यमण्डलम्॥ ४७॥
तेषां मध्ये महाबाहु: श्रीमान् केशवपूर्वज:।
उपविष्टो महाराज पूज्यमान: समन्तत:॥ ४८॥
शुशुभे राजमध्यस्थो नीलवासा: सितप्रभ:।
नक्षत्रैरिव सम्पूर्णो वृतो निशि निशाकर:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन की बात सुनकर सबने उसे स्वीकार कर लिया। फिर राजाओं का वह विशाल समूह वहाँ सर्वत्र विराजमान हो गया। राजाओं का वह समूह आकाश में सूर्य के समान शोभायमान हो रहा था। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई, महाबाहु बलरामजी उनके बीच में विराजमान थे। महाराज! सब ओर से सम्मानित होकर, नीलवस्त्रधारी, गौर वर्ण वाले बलभद्रजी राजाओं के बीच में उसी प्रकार शोभायमान हो रहे थे, जैसे रात्रि में तारों से घिरा हुआ पूर्ण चन्द्रमा शोभायमान होता है। 46-49।
 
On hearing Duryodhan's words, everyone accepted him. Then that huge group of kings sat there everywhere. That group of kings was looking like the sun in the sky. Lord Krishna's elder brother, the illustrious Mahabahu Balramji was seated in the midst of them. Maharaj! Being honoured from all sides, the blue-robed, fair-skinned Balbhadraji was looking beautiful in the midst of the kings just like the full moon surrounded by stars looks beautiful in the night. 46-49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)