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mahabharat 9.55.4-5h: भरतनंदन! हलधर को देखते ही राजा युधिष्ठिर उठ खड़े हुए और बड़े प्रेम और विधिपूर्वक उनका पूजन करके उन्हें बैठने के लिए आसन दिया और उनका कुशलक्षेम पूछा।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  9.55.4-5h 
दृष्ट्वा लाङ्गलिनं राजा प्रत्युत्थाय च भारत।
प्रीत्या परमया युक्त: समभ्यर्च्य यथाविधि॥ ४॥
आसनं च ददौ तस्मै पर्यपृच्छदनामयम्।
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! हलधर को देखते ही राजा युधिष्ठिर उठ खड़े हुए और बड़े प्रेम और विधिपूर्वक उनका पूजन करके उन्हें बैठने के लिए आसन दिया और उनका कुशलक्षेम पूछा।
 
Bharatanandan! On seeing Haldhar, King Yudhishthira stood up and after worshipping him with great love and rituals, he gave him a seat to sit and asked about his health.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)