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mahabharat 9.55.27-28h: वे दोनों अत्यन्त क्रोध से भरे हुए थे। दोनों ने महान् पराक्रम दिखाया था और दोनों ही गदायुद्ध में निपुण रोहिणीनन्दन बलरामजी के शिष्य थे। 27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  9.55.27-28h 
तावुभौ समतिक्रुद्धावुभौ भीमपराक्रमौ॥ २७॥
उभौ शिष्यौ गदायुद्धे रौहिणेयस्य धीमत:।
 
 
अनुवाद
वे दोनों अत्यन्त क्रोध से भरे हुए थे। दोनों ने महान् पराक्रम दिखाया था और दोनों ही गदायुद्ध में निपुण रोहिणीनन्दन बलरामजी के शिष्य थे। 27 1/2॥
 
Both of them were filled with extreme anger. Both of them displayed tremendous bravery and both were the disciples of Balramji, the wise Rohininandan in mace warfare. 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)