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mahabharat 9.55.18-19h: तब भीमसेन ने अपना कवच पहन लिया, हाथ में एक बड़ी नुकीली गदा ली और गरुड़ का रूप धारण करके युद्ध के लिए तैयार हो गये।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  9.55.18-19h 
ततो भीमो महाकोटिं गदां गृह्याथ वर्मभृत्॥ १८॥
बिभ्रद्रूपं महाराज सदृशं हि गरुत्मत:।
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन ने अपना कवच पहन लिया, हाथ में एक बड़ी नुकीली गदा ली और गरुड़ का रूप धारण करके युद्ध के लिए तैयार हो गये।
 
Then Bhimasena put on his armour, took a huge pointed mace in his hand, and taking the form of Garuda, got ready for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)