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mahabharat 9.55.15-16h: उस समय समस्त दिशाएँ शंखों की ध्वनि, युद्ध के तुरहियों की गगनभेदी ध्वनि तथा वीर योद्धाओं की गर्जना से गूंज उठीं।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  9.55.15-16h 
तत: शङ्खनिनादेन भेरीणां च महास्वनै:॥ १५॥
सिंहनादैश्च शूराणां दिश: सर्वा: प्रपूरिता:।
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त दिशाएँ शंखों की ध्वनि, युद्ध के तुरहियों की गगनभेदी ध्वनि तथा वीर योद्धाओं की गर्जना से गूंज उठीं।
 
At that time all directions resounded with the sound of conches, the deep cries of war trumpets and the roars of brave warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)