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श्लोक 9.54.41  |
स शीघ्रगामिना तेन रथेन यदुपुङ्गव:।
दिदृक्षुरभिसम्प्राप्त: शिष्ययुद्धमुपस्थितम्॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| उस तीव्रगामी रथ पर सवार होकर यदुवंशी बलरामजी तुरन्त ही प्रकट होकर दोनों शिष्यों का युद्ध देखने गए ॥41॥ |
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| Yaduvanshi Balarama, who immediately appeared on that fast chariot, went to see the fight between the two disciples. ॥ 41॥ |
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इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने चतुष्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें
सारस्वतोपाख्यानविषयक चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५४॥ |
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