श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  9.54.39 
सरस्वती सर्वनदीषु पुण्या
सरस्वती लोकशुभावहा सदा।
सरस्वतीं प्राप्य जना: सुदुष्कृतं
सदा न शोचन्ति परत्र चेह च॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
सरस्वती सभी नदियों में परम पवित्र हैं। सरस्वती सदैव समस्त जगत का कल्याण करती हैं। सरस्वती को प्राप्त कर मनुष्य इस लोक में या परलोक में अपने पापों के लिए कभी शोक नहीं करते।॥39॥
 
‘Saraswati is the most sacred of all rivers. Saraswati always does good to the whole world. After getting Saraswati, human beings never grieve for their sins in this world or the next.’॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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