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श्लोक 9.54.38  |
सरस्वतीवाससमा कुतो रति:
सरस्वतीवाससमा: कुतो गुणा:।
सरस्वतीं प्राप्य दिवं गता जना:
सदा स्मरिष्यन्ति नदीं सरस्वतीम्॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| सरस्वती नदी के तट पर रहने जैसा सुख और आनन्द और कहाँ मिलेगा? सरस्वती नदी के तट पर रहने जैसा पुण्य और कहाँ मिलेगा? जो लोग सरस्वती नदी का जल पीकर स्वर्ग पहुँच गए हैं, वे सरस्वती नदी को सदैव याद रखेंगे।॥38॥ |
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| ‘Where else can one get the happiness and joy of living on the banks of the Saraswati River? Where else can one find the virtues of living on the banks of the Saraswati River? People who have reached heaven after drinking the water of the Saraswati River will always remember the Saraswati River.'॥ 38॥ |
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