श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  9.54.25-26 
नारद उवाच
पूर्वमेव हतो भीष्मो द्रोण: सिन्धुपतिस्तथा॥ २५॥
हतो वैकर्तन: कर्ण: पुत्राश्चास्य महारथा:।
भूरिश्रवा रौहिणेय मद्रराजश्च वीर्यवान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
नारदजी ने कहा- रोहिणीनन्दन! भीष्मजी तो मारे जा चुके थे। फिर सिंधुराज जयद्रथ, द्रोण, वैकर्तन कर्ण और उनके महान पुत्र भी मारे गये। भूरिश्रवा और शक्तिशाली मद्रराज शल्य भी मारे गये।
 
Naradji said- Rohininandan! Bhishmaji was already killed. Then Sindhuraj Jayadratha, Drona, Vaikartan Karna and his great sons are also killed. Bhurishrava and the mighty Madraraja Shalya were also killed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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