श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 23-25h
 
 
श्लोक  9.54.23-25h 
ततोऽब्रवीद् रौहिणेयो नारदं दीनया गिरा॥ २३॥
किमवस्थं तु तत् क्षत्रं ये तु तत्राभवन् नृपा:।
श्रुतमेतन्मया पूर्वं सर्वमेव तपोधन॥ २४॥
विस्तरश्रवणे जातं कौतूहलमतीव मे।
 
 
अनुवाद
तब रोहिणीनन्दन बलराम ने विनीत स्वर में नारदजी से पूछा- 'तपस्वी! वहाँ एकत्रित हुए समस्त क्षत्रिय राजाओं का हाल मैं पहले ही सुन चुका हूँ। इस समय मुझे कुछ विशेष एवं विस्तृत समाचार जानने की बड़ी जिज्ञासा हो रही है।'
 
Then Rohininandan Balarama asked Naradji in a humble voice- 'Ascetic! I had already heard about the condition of all the Kshatriya kings who had gathered there. At this time I am very curious to know some special and detailed news.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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