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mahabharat 9.52.11-13h: उसके प्राण त्यागने की इच्छा देखकर नारद मुनि ने उससे कहा, 'हे महान व्रत करने वाली निष्पाप नारी! अभी तो तुम्हारा विवाह भी नहीं हुआ है, तुम अभी कन्या ही हो। फिर तुम पुण्यलोक कैसे प्राप्त कर सकती हो? मैंने स्वर्ग में तुम्हारे विषय में ऐसी बात सुनी है। तुमने महान तप किया है; परन्तु पुण्यलोकों पर तुम्हारा अधिकार नहीं हुआ है।'॥11-12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  9.52.11-13h 
मोक्तुकामां तु तां दृष्ट्वा शरीरं नारदोऽब्रवीत्॥ ११॥
असंस्कृताया: कन्याया: कुतो लोकास्तवानघे।
एवं तु श्रुतमस्माभिर्देवलोके महाव्रते॥ १२॥
तप: परमकं प्राप्तं न तु लोकास्त्वया जिता:।
 
 
अनुवाद
उसके प्राण त्यागने की इच्छा देखकर नारद मुनि ने उससे कहा, 'हे महान व्रत करने वाली निष्पाप नारी! अभी तो तुम्हारा विवाह भी नहीं हुआ है, तुम अभी कन्या ही हो। फिर तुम पुण्यलोक कैसे प्राप्त कर सकती हो? मैंने स्वर्ग में तुम्हारे विषय में ऐसी बात सुनी है। तुमने महान तप किया है; परन्तु पुण्यलोकों पर तुम्हारा अधिकार नहीं हुआ है।'॥11-12 1/2॥
 
Seeing her desire to give up her life, sage Narada said to her, 'You sinless woman who has observed a great vow! You have not even been married yet, you are still a girl. Then how can you attain the virtuous world? I have heard such a thing about you in the heaven. You have performed great penance; but you have not gained control over the virtuous worlds.'॥ 11-12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)