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mahabharat 9.52.10-11h: जब वह स्वयं एक कदम भी चलने में असमर्थ हो गई, तब उसने परलोक जाने का विचार किया।   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  9.52.10-11h 
सा नाशकद् यदा गन्तुं पदात् पदमपि स्वयम्॥ १०॥
चकार गमने बुद्धिं परलोकाय वै तदा।
 
 
अनुवाद
जब वह स्वयं एक कदम भी चलने में असमर्थ हो गई, तब उसने परलोक जाने का विचार किया।
 
When she herself became incapable of taking even one step, then she thought of going to the other world. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)