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mahabharat 9.51.8: महाराज! एक दिन जब महात्मा दधीचि सरस्वती नदी में देवताओं को तर्पण कर रहे थे, तब वह पूज्य अप्सरा उनके पास जाकर खड़ी हो गई॥8॥   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.51.8 
तस्य तर्पयतो देवान् सरस्वत्यां महात्मन:।
समीपतो महाराज सोपातिष्ठत भाविनी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! एक दिन जब महात्मा दधीचि सरस्वती नदी में देवताओं को तर्पण कर रहे थे, तब वह पूज्य अप्सरा उनके पास जाकर खड़ी हो गई॥8॥
 
Maharaj! One day, when the great soul Dadhichi was offering oblations to the gods in the river Saraswati, that respectable Apsara went and stood near him. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)