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mahabharat 9.51.50-51h: सारस्वत के ये वचन सुनकर ऋषि उनसे विधिपूर्वक वेदों का उपदेश प्राप्त करके पुनः धार्मिक अनुष्ठान करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.51.50-51h 
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य मुनयस्ते विधानत:॥ ५०॥
तस्माद् वेदाननुप्राप्य पुनर्धर्मं प्रचक्रिरे।
 
 
अनुवाद
सारस्वत के ये वचन सुनकर ऋषि उनसे विधिपूर्वक वेदों का उपदेश प्राप्त करके पुनः धार्मिक अनुष्ठान करने लगे।
 
On hearing these words of Saraswat, the sage, having received the teachings of the Vedas from him in a proper manner, started performing religious rituals once again. 50 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)