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mahabharat 9.51.43-44h: तत्पश्चात्, एक ऋषि, जो प्रतिदिन अध्ययन करता था, शुद्धात्मा ऋषि सारस्वत के पास आया।   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.51.43-44h 
अथ कश्चिदृषिस्तेषां सारस्वतमुपेयिवान्॥ ४३॥
कुर्वाणं संशितात्मानं स्वाध्यायमृषिसत्तमम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, एक ऋषि, जो प्रतिदिन अध्ययन करता था, शुद्धात्मा ऋषि सारस्वत के पास आया।
 
Thereafter, one of the sages, who used to study daily, came to the pure soul sage Saraswat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)