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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
9.51.4
जनमेजय उवाच
कथं द्वादशवार्षिक्यामनावृष्ट्यां द्विजोत्तमान्।
ऋषीनध्यापयामास पुरा सारस्वतो मुनि:॥ ४॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा: 'ऋषिवर! प्राचीन काल में बारह वर्षों के अकाल के समय सारस्वत ऋषि ने श्रेष्ठ ब्राह्मणों को वेदों की शिक्षा कैसे दी?'
Janamejaya asked: 'Sage! In ancient times how did sage Saraswat teach the best brahmins the Vedas during a period of twelve years of drought?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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