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mahabharat 9.51.38-39h: उन महर्षियों को सब ओर से भागते देख सारस्वत मुनि ने भी वहाँ से अन्यत्र जाने का विचार किया। तब देवी सरस्वती ने उनसे कहा।   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.51.38-39h 
दिग्भ्यस्तान् प्रद्रुतान् दृष्ट्वा मुनि: सारस्वतस्तदा॥ ३८॥
गमनाय मतिं चक्रे तं प्रोवाच सरस्वती।
 
 
अनुवाद
उन महर्षियों को सब ओर से भागते देख सारस्वत मुनि ने भी वहाँ से अन्यत्र जाने का विचार किया। तब देवी सरस्वती ने उनसे कहा।
 
Seeing those great sages running from all directions, Saraswat Muni also thought of going somewhere else from there. Then Goddess Saraswati said to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)