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mahabharat 9.51.27-28h: तत्पश्चात् इन्द्र ने देवताओं से कहा, 'ऋषि दधीचि की अस्थियों के अतिरिक्त कोई भी अन्य शस्त्र देवताओं के शत्रु इन महान दैत्यों को नहीं मार सकता।   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  9.51.27-28h 
ततोऽब्रवीत् सुरान् शक्रो न मे शक्या महासुरा:॥ २७॥
ऋतेऽस्थिभिर्दधीचस्य निहन्तुं त्रिदशद्विष:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् इन्द्र ने देवताओं से कहा, 'ऋषि दधीचि की अस्थियों के अतिरिक्त कोई भी अन्य शस्त्र देवताओं के शत्रु इन महान दैत्यों को नहीं मार सकता।
 
Thereafter Indra said to the Gods, 'Except the bones of sage Dadhichi, no other weapon can kill these great demons who are enemies of the Gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)