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mahabharat 9.51.23-24h: हे शुभ! हे परम सौभाग्यवती सरस्वती! मेरी कृपा से तुम सदैव अन्य पवित्र नदियों से भी अधिक पवित्र रहोगी।॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  9.51.23-24h 
पुण्याभ्यश्च सरिद्भॺस्त्वं सदा पुण्यतमा शुभे॥ २३॥
भविष्यसि महाभागे मत्प्रसादात् सरस्वति।
 
 
अनुवाद
हे शुभ! हे परम सौभाग्यवती सरस्वती! मेरी कृपा से तुम सदैव अन्य पवित्र नदियों से भी अधिक पवित्र रहोगी।॥23 1/2॥
 
O auspicious one! O extremely fortunate Saraswati! By my grace you will always remain more sacred than other sacred rivers.'॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)