Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.51.13-15h: ब्रह्मर्षि! यह आपका पुत्र है। आपकी भक्ति के कारण मैंने इसे अपने गर्भ में धारण किया है। ब्रह्मर्षि! पूर्वकाल में आपने अलम्बुषा नामक अप्सरा को देखकर जो वीर्यपात किया था, उसे मैंने अपने गर्भ में धारण किया था; आपकी भक्ति के कारण मैंने सोचा था कि आपका तेज नष्ट न हो। अतः आप मेरे द्वारा दिए गए अपने इस सुन्दर पुत्र को स्वीकार करें।॥13-14 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मर्षि! यह आपका पुत्र है। आपकी भक्ति के कारण मैंने इसे अपने गर्भ में धारण किया है। ब्रह्मर्षि! पूर्वकाल में आपने अलम्बुषा नामक अप्सरा को देखकर जो वीर्यपात किया था, उसे मैंने अपने गर्भ में धारण किया था; आपकी भक्ति के कारण मैंने सोचा था कि आपका तेज नष्ट न हो। अतः आप मेरे द्वारा दिए गए अपने इस सुन्दर पुत्र को स्वीकार करें।॥13-14 1/2॥
Brahmarshi! This is your son. I carried him in my womb due to my devotion towards you. Brahmarshi! Earlier, I carried in my womb the semen that you had ejaculated after seeing the Apsara named Alambusha; because of my devotion towards you, I had thought that your glory should not be destroyed. Therefore, please accept this beautiful son of yours given by me.'॥ 13-14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥