श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.51.12 
ऋषिसंसदि तं दृष्ट्वा सा नदी मुनिसत्तमम्।
तत: प्रोवाच राजेन्द्र ददती पुत्रमस्य तम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! महर्षि दधीच को मुनियों की सभा में बैठे देखकर सरस्वती नदी ने उनका पुत्र उन्हें सौंप दिया और इस प्रकार बोली -॥12॥
 
King! Seeing the great sage Dadhicha sitting in the assembly of sages, the river Saraswati handed over his son to him and spoke thus -॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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